गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति नही हो सकती - पंडित मनोज शर्मा



मगरलोड :- 
गौरव ग्राम मेघा में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह कथा आयोजन के तीसरे व चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास आचार्य मनोज शर्मा जी महाराज ने सती चरित, ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद  और नरसिह अवतार प्रसंग पर कथा सुनाई । उन्होंने प्रसंग के माध्यम से उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया। भक्त ध्रुव ने तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न  किया। भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि भक्ति को  बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए। कथा में बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया है। अजामिल उपाख्यान के माध्यम से इस बात को विस्तार से समझाया गया। भगवान नृसिंह रूप में खंभे को फाड़कर प्रकट हुए। प्रसंग बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी है और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए। कथा के दौरान कई भजन हुए जिसमें भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।
साथ ही गुरु की महिमा का बखान किया और कहा कि गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती। भक्त प्रह्लाद ने ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप कर भगवान विष्णु का दर्शन प्राप्त किया। यदि भक्ति सीखनी है, तो प्रह्लाद के जीवन चरित्र को आत्मसात करें। उन्होंने अपने विश्वास और भक्ति से भगवान विष्णु को पाया,भागवत सुनने हेतु बड़ी संख्या में ग्रामवासी श्रद्धालुजन उपस्थित रहे....

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