गोबरा नवापारा में अवैध लकड़ी तस्करी पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई


 गोबरा नवापारा में वन विभाग ने पकड़ी अवैध लकड़ी तस्करी, 3 ट्रैक्टर लकड़ी से भरे जब्त
गोबरा नवापारा, वन विभाग ने अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आरंग क्षेत्र के ग्राम फरफौद से लकड़ी लाकर गोबरा नवापारा की निजी आरा मिलों में खपाने की कोशिश कर रहे तस्करों को वन विभाग की टीम ने धर दबोचा। इस कार्रवाई में 3 ट्रैक्टरों को लकड़ी समेत जब्त किया गया है। वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि आरंग क्षेत्र के ग्राम फरफौद से अवैध रूप से काटी गई लकड़ी को ट्रैक्टरों के जरिए गोबरा नवापारा लाया जा रहा है। कहीं ना कहीं इस लकड़ी को गोबरा नवापारा की निजी आरा मिलों में खपाने की योजना का अंदेशा प्रतीत मालुम होता है। सूचना के आधार पर वन विभाग ने एक विशेष अभियान चलाया। 
21 मार्च को डिप्टी रेंजर झुमुकलाल देवांगन के नेतृत्व में डिपो प्रभारी अभिषेक श्रीवास्तव, फारेस्ट गार्ड रोहित साहू, हिलेश साहू, चौकीदार आनंद साहू और डागेंद्र साहू की टीम ने छापेमारी की। इस दौरान तीन ट्रैक्टर पकड़े गए, जिनमें भारी मात्रा में कटी हुई लकड़ी लदी हुई थी। पकड़े गए ट्रैक्टरों में से दो नीले रंग के थे, जिनमें लकड़ी को रस्सियों से बांधकर रखा गया था। तीसरे ट्रैक्टर में भी लकड़ी भरी थी। प्रारंभिक जांच में यह लकड़ी कहुवा, नीम, और बबूल जैसी प्रजातियों की बताई जा रही है l
 कानूनी कार्रवाई वन विभाग ने पकड़े गए ट्रैक्टरों को जब्त कर लिया है और चालकों से पूछताछ शुरू कर दी है। इस मामले में वन संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस लकड़ी की कीमत लाखों रुपये हो सकती है, और दोषियों को भारी जुर्माना और सजा का सामना करना पड़ सकता है l पर्यावरण पर प्रभाव विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध लकड़ी तस्करी से जंगल सिकुड़ रहे हैं, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों का आवास खतरे में है। इसके अलावा, यह जलवायु परिवर्तन की समस्या को भी बढ़ा रहा है आगे की कार्रवाई वन विभाग ने गोबरा नवापारा और आसपास के क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही, स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे अवैध कटाई या तस्करी की सूचना तुरंत विभाग को दें।
गोबरा नवापारा में वन विभाग की इस कार्रवाई से अवैध लकड़ी तस्करी पर अंकुश लगने की उम्मीद है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सकेगा? इसके लिए प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय समुदाय को मिलकर काम करने की जरूरत है।

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