अनूठी पहल : धर्मनगरी राजिम में राष्ट्रभक्ति का नया स्वर, हर सुबह गूंजता है राष्ट्रीय गान
राजिम में राष्ट्रभक्ति की अनूठी पहल
धर्मनगरी राजिम में राष्ट्रभक्ति का नया स्वर, हर सुबह गूंजता है राष्ट्रीय गान
राजिम, छत्तीसगढ़ की धर्मनगरी के रूप में प्रसिद्ध राजिम अब राष्ट्रभक्ति के एक अनूठे रंग में रंग रहा है। यहाँ पंडित सुंदरलाल शर्मा चौक पर हर सुबह 7:50 बजे नगरवासियों का समूह एकत्रित होता है, जहाँ स्कूली छात्र, कारोबारी, युवा, महिलाएँ, बुजुर्ग और समाज के हर वर्ग के लोग उत्साह के साथ राष्ट्रीय गान गाते हैं। इस पहल ने राजिम को न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में, बल्कि राष्ट्रप्रेम की भावना को जीवंत करने वाली नगरी के रूप में भी नई पहचान दी है।
इस अभियान की शुरुआत 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष महेश यादव और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मिलकर की थी। तब से यह सिलसिला बिना रुके जारी है। सुबह की शांत और ताज़ा हवा में जब राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ की स्वरलहरियाँ गूंजती हैं, तो हर व्यक्ति के मन में देश के प्रति गर्व, सम्मान और एकता का भाव जागृत होता है। यह दृश्य न केवल हृदयस्पर्शी है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव की एक मिसाल भी प्रस्तुत करता है।
नगर पंचायत अध्यक्ष महेश यादव ने इस पहल के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य राजिम के लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत करना है। उन्होंने बताया, “हम चाहते हैं कि हर व्यक्ति अपने दिन की शुरुआत देश के प्रति सम्मान और एकता के साथ करे। यह छोटा सा प्रयास समाज को एकजुट करने और देशभक्ति को बढ़ावा देने में बड़ा बदलाव ला सकता है।”
इस अभियान की लोकप्रियता अब राजिम की सीमाओं को पार कर पूरे जिले में फैल रही है। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी लोग इस पहल से प्रेरित होकर ऐसी गतिविधियों को शुरू करने की योजना बना रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने इसे एक प्रेरणादायक कदम बताया है। इस पहल की सराहना करते हुए जिला प्रशासन ने भी इसे समर्थन देने की बात कही है।
नगर पंचायत ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भविष्य में कई योजनाएँ तैयार की हैं। इनमें राष्ट्रीय गान के साथ-साथ स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, और युवाओं के लिए देशभक्ति पर आधारित कार्यशालाएँ आयोजित करना शामिल है। इसके अलावा, विशेष अवसरों जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती पर सांस्कृतिक और देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन भी प्रस्तावित है। इन आयोजनों के माध्यम से राजिम को एक ऐसी नगरी के रूप में स्थापित करने का प्रयास है, जो धर्म और संस्कृति के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम का भी प्रतीक बने।
यह पहल न केवल स्थानीय लोगों के बीच एकता और राष्ट्रप्रेम को बढ़ावा दे रही है, बल्कि यह पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए एक प्रेरणा बन रही है। राजिम का यह छोटा सा प्रयास यह साबित करता है कि सामूहिक इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच के साथ छोटे-छोटे कदम भी समाज में बड़े बदलाव ला सकते हैं। धर्मनगरी राजिम अब राष्ट्रभक्ति की इस अनूठी पहल के साथ एक नई मिसाल कायम कर रही है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगी।
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