भद्रा काल में भी गणेश स्थापना शास्त्रसम्मत : पंडित विकास मिश्रा


राजिम, 27 अगस्त।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर बुधवार को गणेशोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस वर्ष गणेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथि 26 अगस्त दोपहर 1:54 बजे से प्रारंभ होकर 27 अगस्त दोपहर 3:44 बजे तक रही। गणेश पूजन का अनिवार्य समय मध्याह्न (सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक) आया।

इसी अवधि में भद्रा काल (सुबह 2:46 से दोपहर 3:44 बजे तक) होने के कारण श्रद्धालुओं में संशय उत्पन्न हुआ। इस पर भागवताचार्य पंडित विकास मिश्रा ने स्पष्ट किया कि “भद्रा दोष केवल सांसारिक कार्यों जैसे विवाह, यात्रा, गृहप्रवेश आदि को प्रभावित करता है, देव पूजा को नहीं।”

उन्होंने निर्णयसिन्धु ग्रंथ का उल्लेख करते हुए कहा –
“देवपूजादिकं कार्यं भद्रायां न निषिध्यते”
अर्थात् देव स्थापना, जप, तप, होम, दान आदि कार्य भद्रा में भी पूर्णतः मान्य हैं।

पंडित मिश्रा ने कहा कि गणेश चतुर्थी की पूजा का विधान है – “मध्याह्ने श्रीगणेशं सम्पूज्येत्” – यानी मध्याह्न में ही गणपति पूजन शास्त्रसम्मत है। अतः इस वर्ष भद्रा काल में भी गणेश स्थापना करना पूर्णतः उचित और पुण्यकारी है।

विशेष कामनाओं हेतु अर्पण

पंडित मिश्रा ने श्रद्धालुओं से कहा कि गणेश चतुर्थी पर यदि मनुष्य अपनी विशेष कामना अनुसार अर्पण करे तो उसका फल शीघ्र प्राप्त होता है –

धन-समृद्धि हेतु – गणेश जी को दूर्वा और गुड़ चढ़ाएँ।

विद्या व सफलता हेतु – लाल पुष्प व मोदक अर्पित करें।

स्वास्थ्य व आयु वृद्धि हेतु – गणेश जी को सिंदूर और घी का दीपक चढ़ाएँ।

विवाह व संतान सुख हेतु – लाल चंदन और गजमुखास्य मंत्र का जाप करें।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे निडर होकर गणेश जी की मध्याह्न पूजा करें और परिवार में सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना करें।

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