दंतेवाड़ा - बस्तर की जमीन को पौधों के लिए प्रतिकूल बताना हास्यास्पद : तेजराम विद्रोही
कॉर्पोरेट हित में काटे जायेंगे जंगल
नगरनार स्टील प्लांट से लौह अयस्क को सीधे बचेली तक पहुँचाने के लिए एन एम डी सी 15 किलोमीटर लम्बी पाइपलाइन बिछा रहा है जिसके लिए दंतेवाड़ा और बस्तर में करीब पांच हजार पेड़ काटने की तैयारी है। वहीं काटे जाने वाले पेड़ों के एवज में दंतेवाड़ा बस्तर से करीब 800 किलोमीटर दूर बलरामपुर में पौधे लगाए जायेंगे इसके कारणों का हवाला देते हुए वन अधिकारी का यह कहना कि दंतेवाड़ा -बस्तर की जमीन पौध रोपण के लिए अनुकूल है नहीं , बेहद ही हास्यास्पद व शर्मनाक है।
राज्य सरकार द्वारा एन एम डी सी के माध्यम से कॉर्पोरेट हित में पेड़ काटे जाने और वन अधिकारी के हास्यास्पद बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि दंतेवाड़ा- बस्तर की जमीन को पथरीली बताना और पौध रोपण के लिए अनुकूल नहीं होने का हवाला देना बेहद ही हास्यास्पद और शर्मनाक है। ऐसे अधिकारी को बयान देने से पहले यह सोचना चाहिए कि जहाँ से पाइप लाइन बिछाई जा रही है वह दंतेवाड़ा- बस्तर की ही जमीन है वहाँ प्रकृति ने हजारों साल पहले ही वन सम्पदा से अच्छादित कर रखा है। राज्य सरकार यह भी बताए कि दंतेवाड़ा बस्तर में काटे जाने वाले पेड़ों की एवज में 800 किलोमीटर दूर बलरामपुर में पौधे लगाए जाएंगे तो कोरबा रायगढ़ में कोयला खनन के नाम पर काटे गए पेड़ों के एवज में कहाँ कहाँ पौधे लगाए गए हैं? दंतेवाड़ा -बस्तर में होने वाले पर्यावरणीय दुसप्रभाव को 800 किलोमीटर दूर से कैसे रोका जायेगा? प्रकृति द्वारा निर्मित वन सम्पदा को विकास के नाम पर नष्ट कर कृत्रिम वन तैयार नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार प्रत्येक साल वृक्षारोपण में करोड़ों रूपये खर्च करती है जिससे अब तक तो बड़े पैमाने पर जंगल तैयार हो जाता परन्तु हुआ नहीं। इसका मूल कारण जमीन पथरीली या प्रतिकूलता नहीं बल्कि सरकार की कॉर्पोरेट परस्त नियत है जिनकी नीतियाँ प्रकृति को संरक्षित रखने के प्रति अनुकूल नहीं है।
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