सुशासन तिहार के पड़ोस में 'कुशासन खनन उत्सव', अफसरों की सूचना पर मुरुम माफिया हुए 'अदृश्य'!
गोबरा नवापारा। एक तरफ छत्तीसगढ़ शासन सुशासन तिहार के शिविर लगाकर जनता को न्याय दिलाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ गोबरा नवापारा तहसील के ग्राम पंचायत नवागांव में उसी शिविर से चंद कदमों की दूरी पर मुरुम का अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है। इसे कहते हैं 'सुशासन की नाक के नीचे कुशासन का कारोबार'।
ग्रामीणों ने बताया कि सुबह से ही चैन माउंटेन और हाइवा मशीनें जमीन का सीना चीर रही थीं। जब इसकी सूचना जिम्मेदार खनिज अधिकारियों को दी गई तो कमाल हो गया। अफसर पहुंचते, उससे पहले ही चैन माउंटेन और हाइवा हवा हो गए। मानो माफियाओं के पास अधिकारियों के आने का 'लाइव लोकेशन' पहले से था। शिकायत के 3 घंटे बाद तक भी खनिज विभाग का कोई नुमाइंदा मौके पर नहीं पहुंच पाया।
सवाल उठता है कि माफियाओं को किसने खबर कर दी? क्या खनिज विभाग और मुरुम माफियाओं के बीच 'अदृश्य तार' जुड़े हैं? विभाग के जिम्मेदार अधिकारी फोन पर गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। कोई कहता है "टीम रवाना हो गई", तो कोई कहता है "जांच कर रहे हैं"। लेकिन मौके पर न टीम दिखी, न जांच।
सुशासन तिहार में आवेदन देने की बात ग्रामीण व्यंग्य कस रहे हैं कि "साहब, यहां सुशासन का आवेदन जमा हो रहा है और उधर कुशासन की मशीनें मुरुम लूट रही हैं।" बिना रॉयल्टी, बिना अनुमति के रोज सैकड़ों हाइवा मुरुम ढोया जा रहा है। शासन को लाखों के राजस्व का चूना लग रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब खनिज विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो खनन माफिया पूरे गांव की जमीन ही खोद डालेंगे। फिलहाल नवागांव में 'खनन उत्सव' जारी है और सुशासन तिहार के बैनर मुंह चिढ़ा रहे हैं।
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