संगम में साफ पानी नहीं, कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालु कैसे करेंगे पुण्य स्नान
27 नवंबर दिन सोमवार को नादिया मड़ई पर जुटेंगे बड़ी संख्या में श्रद्धालु
नागेंद्र निषाद की रिर्पोट
राजिम 25 नवंबर। त्रिवेणी संगम पर दिन सोमवार 27 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुन्नी स्नान करेंगे। इन्हीं के साथ मेला मड़ई का दौर शुरू हो जाता है। पूरे छत्तीसगढ़ में इसकी प्रसिद्धि नदिया मड़ई के रूप में है। प्रदेश भर से लोग यहां स्नान दान एवं मनी घूमने के लिए आते हैं। पूरे कार्तिक मास तक कुंवारी कन्याएं अल सुबह उठकर स्नान करती है तथा महादेव के मंदिर में जाकर पूजन अर्चन किया जाता है जिसका समापन वह संगम में स्नान के साथ ही रेत से शिवलिंग बनते हैं और जल अभिषेक किया जाता है तथा शिवजी में समर्पित किए जाने वाले बिल्व पत्र इत्यादि पूजन सामग्री चढ़ते हैं। क्योंकि कार्तिक मास को भक्ति भाव का पर्व माना जाता है। त्रिवेणी संगम में स्नान करने का फल कई गुना बताया जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जाकर स्नान दान जप पूजन पाठ इत्यादि करते हैं। यहां के प्रसिद्ध मंदिर तीन नदी के संगम में स्थित कुलेश्वर नाथ महादेव, तट में स्थित पंचेश्वरनाथ महादेव, भूतेश्वरनाथ महादेव, राज राजेश्वरनाथ महादेव,दान दानेश्वर नाथ महादेव, बाबा गरीब नाथ महादेव, सोमेश्वर नाथ महादेव, प्रसिद्ध भगवान विष्णु का राजीव लोचन मंदिर, महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, वराह अवतार मंदिर, नरसिंह अवतार मंदिर, वामन अवतार मंदिर, बद्रीनारायण मंदिर, कमल क्षेत्र के आराध्य देवी आदि शक्ति मां महामाया मंदिर इत्यादि बड़ी संख्या में यहां प्राचीन कालीन मंदिर है जहां जाकर देवी देवताओं का पूजन आराधना किया जाता है। संगम में स्नान के लिए स्वच्छ पानी दिखाई नहीं दिया। कुछ रुका हुआ गंदे पानी में स्नान के औपचारिकता पूरी करने पड़ेंगे। हर साल यही स्थितियां निर्मित होती है न ही प्रशासन पुन्नी स्नान के लिए एक्टिव रहते हैं जिसके कारण श्रद्धालुओं को मजबूरी में स्नान करना पड़ता है। कहने को तो यहां पर चार एनीकट है। लेकिन किसी में भरपूर पानी नहीं है संगम एनीकट, नवागांव एनीकट में बार-बार गेट खोलने और बंद करने का खेल चल रहा है। जिसके कारण स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। बताया जाता है कि नवागांव एनीकट धमतरी डिविजन के अंतर्गत आता है तथा संगम एनीकट जल संसाधन विभाग के रायपुर डिवीजन में है। शासन प्रशासन ने करोड़ों रुपया खर्च कर पानी रोकने के लिए एनीकट तो बना दिए हैं लेकिन पानी रोकने में उदासीनता के चलते यह स्थितियां निर्मित हो रही है या फिर कहा जाए की रेत घाट वाले को फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल चल रहा है।
कार्तिक पुन्नी मेला में तीन जिला के लोग ज्यादा संख्या में आते हैं
कार्तिक पूर्णिमा में स्नान के लिए प्रमुख रूप से गरियाबंद जिला रायपुर जिला एवं धमतरी जिला के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित होते हैं इनके अलावा अन्य जिला के लोग भी आते हैं एक जानकारी के मुताबिक पूरे छत्तीसगढ़ से लोगों का आना-जाना इस दिन रहता है लोग इस स्नान को अत्यंत पवित्र मानते हैं और सुबह से ही उपस्थित होकर स्नान के पश्चात दीपदान भी करते हैं। इतने महत्वपूर्ण आयोजन पर स्वच्छ पानी न होना प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है।
कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर के आसपास मड़ाई मेला स्थल पर पानी का ठेलान होने के कारण कांप जमा हो गया है। इन्हें साफ करना बहुत जरूरी है यहां पर मिट्टी के कांप से बड़ी परेशानी होगी। बताना होगा कि कार्तिक पुन्नी मड़ाई मेला नदी की रेत पर ही लगता है। इसलिए साफ सफाई भी जरूरी हो जाता है।
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