दोनों हाथ से दिव्यांग एम ए पास गोविंद की किस्मत क्या चमकेगी
सुपरवाइजर बनने की रखते हैं इच्छा गोविंद
आज तक किसी भी जन प्रतिनिधि से कोई सहयोग नहीं मिला
हौसलों के भरोसे पैरों से लिखकर किया अर्थशास्त्र में एमए तक की पढ़ाई
तेरा दर्द न जाना कोए ,
दोनों हाथों से विकलांग गोविंद रोजगार के लिए दर-दर भटक रहा
राजिम। कहते हैं किस्मत हाथों के लकीरों में होती हैं, लेकिन जिनके हाथ ही नहीं होते क्या उनकी किस्मत नहीं होती। ऐसा ही एक मामला शहर से कुछ दूर के ग्राम कुंडेल का हैं। जहां मनबोध बघेल के पुत्र गोविंद बघेल के जन्म से ही दोनों हाथ विकसित नही हो पाया लेकिन पढ़ाई के क्षेत्र में अपने हौसले के दम पर गोविंद ने अर्थशास्त्र में एमए की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। किस्मत का खेल तो देखो इतनी पढ़ाई करने के बाद भी वे रोजगार की तलाश में दर दर भटक रहे हैं। शासन प्रशासन की अनदेखी के वजह से गोविंद को कोई रोजगार नही मिल रहा हैं। दोनों हाथ से विहीन गोविंद विधायक,सांसद व जिला प्रशासन में रोजगार के लिए आवेदन लगा चुके हैं। बताया जाता है कि दोनों हाथ नहीं होने के कारण उन्हें रोजगार देने में साफ मना कर दिया गया। मतलब जितनी सजा ऊपर वाले ने गोविंद को दिया है, उससे ज्यादा जुल्म तो शासन-प्रशासन कर रही हैं। गोविंद ने बताया कि वह ज्यादा मेहनत तो नही पाएगा, लेकिन कोई भी विभाग में लिखा पढ़ी का काम बखूबी कर सकता हैं। उनका यह भी कहना है कि जिनके एक हाथ, एक पैर या दोनों पैर नही होते उन्हें प्रशासन दिव्यांग आरक्षण में जॉब दिला देते हैं। लेकिन जिनके दोनो हाथ न हो उसके लिए प्रशासन द्वारा कोई अलग से आरक्षण की श्रेणी नहीं बनाया गया हैं। जिसके कारण उन्हें रोजगार नही मिल रही हैं।
ब्लॉक मुख्यालय फिंगेश्वर के ग्राम पंचायत कुंडेल निवासी मनबोध बघेल के 4 बेटा व 1 बेटी में से तीसरे नंबर के बेटा गोविंद का जन्म 9 सितंबर 1997 को हुआ। जन्म के बाद दोनों हाथ विकसित नही हो पाया। जिससे उनके परिवार वाले काफी चिंतित रहते थे। वह अपने पैरों को ताकत बनाकर रोजमर्रा के कार्य के साथ साथ लिखने का भी अभ्यास शुरू किया। उनके हौसले को देखकर परिवार वालो ने ग्राम कुंडेल के प्राथमिक शाला में भर्ती कराया जिसके बाद से वह बिना रुकावट के एमए तक की पढ़ाई पूरी कर चुका हैं। वह पोस्ट ऑफिस विभाग में आवेदन लगाया था लेकिन दोनों हाथों से दिव्यांग व्यक्ति के लिए आरक्षण नही होने के कारण उन्हें इस विभाग में रोजगार नही मिल पाया। अगर गोविंद को रोजगार का साधन नही मिलता हैं तो उसे भविष्य में जीविकोपार्जन में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ सकता हैं।
सरकारी सुविधा के नाम पर उसे समाज कल्याण विभाग से सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तौर पर प्रति माह 500 रुपये मिलता हैं। बताना होगा कि यह राशि बढ़ते उम्र के साथ नाकाफी हैं। इसलिए वह वर्तमान में रोजगार तलाशने में जुटा हुआ हैं। लेकिन कोई भी जगह उसे रोजगार नही मिल रहा हैं। वहीं विभाग द्वारा गोविंद को कृत्रिम हाथ लगवाने की भी सलाह दिया गया। उन्होंने दैनिक दिनचर्या प्रभावित होने की आशंका के कारण कृत्रिम हाथ लगवाने से मना कर दिया।
जिला प्रशासन सहित जनप्रतिनिधि भी नहीं दिल पाये रोजगार
दिव्यांग गोविंद बघेल ने बताया कि वह रोजगार के लिए स्थानीय विधायक, सांसद सहित कलेक्टर दफ्तर में आवेदन लगाया। जहां सिर्फ आश्वासन मिला। पिछले अक्टूबर माह में जिला कलेक्टर के समक्ष रोजगार के लिए आवेदन लगाया था। जिला कलेक्टर द्वारा साफ मना कर दिया कि आपको रोजगार नहीं दिला सकते। जबकि गोविंद सुपरवाइजर सहित लिखा पढ़ी की काम कर लेने की बात कह रहा हैं।
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