पर्यावरण बचाना केंद्रीय मुद्दा बने: तेजराम विद्रोही
हरिद्वार राष्ट्रीय चिंतन शिविर में रखी बात
भारतीय किसान यूनियन द्वारा 16 से 18 जून 2024 को लालकोठी हरिद्वार में आयोजित राष्ट्रीय चिंतन शिविर में छत्तीसगढ़ की समस्याओं को राज्य के प्रतिनिधियों द्वारा मजबूती से रखा गया।
भारतीय किसान यूनियन के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि जितना महत्वपूर्ण किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी का है उतना ही ज्यादा महत्वपूर्ण पर्यावरण संरक्षण का है जिसे चिंतन शिविर का प्रमुख हिस्सा बनना चाहिए क्योंकि किसान अपनी खेती के लिए प्रकृति पर निर्भर है। क्योंकि सूखा, अतिवर्षा अथवा बेमौसम बारिश के कारण फसल को पहुंचने वाली नुकसान से किसान मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक रूप से टूट जाता जिसे केवल चंद मुआवजा राशि से पूरा नहीं किया जा सकता है। कॉरपोरेट घरानों को मुनाफा पहुंचाने के लिए पूंजीपति- सरकार व माफिया गठबंधन से जल, जंगल और जमीन की भयावह लूट मची हुई है। इस बात को छत्तीसगढ़ में हसदेव जंगल की अंधाधुंध कटाई से समझा जा सकता है जहाँ पर अडानी को कोयला खनन के लिए 1लाख 70 हजार हेक्टेयर में फैले वनों की कटाई तेजी से चल रही है इसे बचाना हम सब का कर्तव्य है। साथ ही तेजराम विद्रोही ने छत्तीसगढ़ राज्य में तथा केंद्रीय स्तर पर धान के समर्थन मूल्य के अंतर भी बात रखी और कहा जो जिस राज्य में भाजपा की सरकार है और जहां भाजपा की सरकार नहीं वहाँ समर्थन मूल्य में अंतर क्यों?
बीजापुर जिला अध्यक्ष साम्बईय्या धन्नूर ने बस्तर संभाग में माओवाद के नाम पर निर्दोष आदिवासियों के ऊपर हो रही सरकारी दमन की बात करते हुए कहा कि हम भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले बस्तर संभाग में काम कर रहे हैं और जब कोई बड़ा कार्यक्रम किसान यूनियन के बैनर तले करते हैं तो पुलिस प्रशासन इसके पीछे माओवादियों का हाथ होना बताते हैं। और तो और छत्तीसगढ़ के बाहर राज्यों में जब छत्तीसगढ़ की बात आती है तो लाल सलाम इलाके से आने वाले लोग बताते हैं जो छत्तीसगढ़ राज्य की भोली भाली आदिवासी जनता का घोर अपमान है और इससे हम आहत होते हैं।
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