नगर पालिका चुनाव को लेकर नगर में चर्चा का दौर हुआ शुरू
नागेन्द्र निषाद की रिपोर्ट
अध्यक्ष व पार्षद पद के दावेदारों ने लोगों की पूछ परख करने लगे
नवापारा राजिम। प्रदेश में नगरीय निकाय के चुनाव को लेकर नगर पालिका गोबरा नवापारा नगर में भी राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है।
नगर के चौक चौराहों , होटलों,पान ठेलों , सार्वजनिक स्थलों मे पालिका चुनाव की चर्चा हो रही है।पालिका मे 21 वार्डों के पार्षद के अलावा अध्यक्ष पद के लिए मतदान होना है। इसको लेकर उत्सुकता का माहौल इसलिये बन गया है कि आने वाले समय में पालिकाध्यक्ष के साथ साथ विभिन्न वार्डों का आरक्षण इस बात के लिये होना है कि अध्यक्ष पद इस बार सामान्य, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति वर्ग पुरुष या है, महिला के खाते में जाएगा इसी तरह विभिन्न वार्डों में कौन से वार्ड नए मे सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग, की अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग का होगा तथा कौन
सा वार्ड महिला एवं पुरूष श्रेणी मे जायेगा इसको लेकर लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे है हालांकि संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया मे अभी अधिकृत घोषणा होना बांकी है। लेकिन संभावित वार्ड पार्षद एवं पालिकाध्यक्ष पद के दावेदार लोग स्थिति को भांपकर आम नागरिकों से मेल जोल बढा चुके है व पूर्व की तुलना मे उनका आचार विचार बोल चाल व मेल मिलाप का वातावरण ऐसे बन गया है मानो वे याचक की भूमिका मे आम नागरिकों से कुछ चाह रहे है।
नगर पालिका परिषद गोबरा नवापारा, जिला रायपुर के पालिका में वर्तमान मे गोबरा नवापारा पालिकाध्यक्ष पद सहित पार्षदों का बहुमत कांग्रेस के साथ है जिनका कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। हालांकि कहा नहीं जा सकता कि पालिका चुनाव अपने निर्धारित समय पर होंगे या फिर कुछ एक महीने के लिये आगे चलकर होंगे बहरहाल पालिका चुनाव पर सब की निगाहें टिकी हुई है इस बीच भाजपा व कांग्रेस दोनो दलो के लोग राजनीतिक स्तर पर अंदरूनी रूप से अपनी अपनी तैयारी में में लग चुके है।
इस बार का पालिका चुनाव बड़ा ही दिलचस्प होने की संभावना है। क्योंकि दोनों ही राजनीतिक दलों के दावेदारों की संख्या काफी है।
वहीं अगर अध्यक्ष सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होता है तो भाजपा व कांग्रेस दोनों ही दलों से दर्जन भर से अधिक दावेदार अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।
अध्यक्ष पद के लिए कुछ पुराने अनुभवी पार्षद मैदान में उतरने के लिए तैयार है। दोनों ही पार्टी अगर अध्यक्ष के लिए नए चेहरे को मौका दे तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। कुछ ऐसा ही प्रयोग विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किया था। कांग्रेस ने अपने पुराने चेहरे पर ही दांव खेला था। जीत आखिर नए चेहरे की हुई।

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