गौरी गौरा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं ने घंटों पिटवाए सांकड़
रात में ही गौरी गौरा की निकाली गई बारात
राजिम 3 नवंबर। अंचल में दीपावली पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया इस मौके पर लक्ष्मी पूजा की रात्रि मिट्टी से गौरा गौरी का निर्माण किया गया प्रतिमा निर्माण करने के पश्चात पूजा अर्चना किया गया। मंडप बनाए गए थे जिसमें परिक्रमा भी हुआ। बालिकाओं के द्वारा कलसा को धान की बाली से आकर्षक रूप दिया गया था। नांदी में धान रखा गया। दीप प्रज्वलित किया गया। छोटी बड़ी कुंवारी बालिकाएं गौरा गौरी के साथ में कलसा उठाकर पूरे मोहल्ले में भ्रमण किया गया। लोग रात भर जाकर गौरा गौरी महोत्सव को देखने बड़े ही अतुल दिखाई दिए। अर्धरात्रि को ही प्रत्येक घरों से तेल लिया गया और उन्ही तेल से दीप जलाया गया जैसे ही गौरा ग़ौरी भ्रमण के लिए निकले रात्रि के अंधेरे में भी दीपक की रोशनी से जगमग हो गया गौरा गौरी की जयकारा तथा लोग सांकड़ भी ले रहे थे। सुबह से ही श्रद्धालुओं के द्वारा दर्शन पूजन का क्रम शुरू हुआ पश्चात विसर्जन के लिए निकले तब सांकड़ पीटने और पिटवाने वाले देखते ही देखते बढ़ गए। लोग घंटे भर तक सांकड़ पिटवाते रहे। किसी ने हाथ, पैर व कमर में सांकड़ लेने के बाद उनके दिए के तेल को जिस जगह पर मारे गए थे वहां लगाकर रिलैक्स महसूस।
काहे का बना होता है सांकड़
बताना होगा कि सागर काशी के पौधे या फिर मोआ से बना होता है। सबसे पहले इसे काटकर लाया जाता है उसके बाद रस्सी जैसे इन्हें आटा जाता है बाद इन्हें सोटा का रूप दिया जाता है। सकड़ी लेने के लिए किसी को बोलने की जरूरत नहीं होती है वह स्वत चलकर आते हैं इधर छत्तीसगढ़ी वाद्य यंत्र निशान, दफड़ा, मोहरी, इत्यादि बजाए जाते हैं। इनके धुन पर लोग झूमते और नाचते भी हैं। शहर के विभिन्न चौक चौराहों के अलावा चौबेबांधा,सिंधौरी, बरोंड़ा, श्यामनगर, सुरसाबांधा, तर्रा, कुरूसकेरा, पीतईबंद, रावड़, भैंसातरा, बेलटुकरी, कोंदकेरा, परतेवा, पीपरछेड़ी, परसदा जोशी, अरंड, हथखोज, धमनी किरवई धूमा देवरी जेंजरा कोपरा इत्यादि हैं।
तालाब में किया गया विसर्जन
नदी तालाब में विसर्जन किया गया। यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामवासी में महिला पुरुष एवं बच्चे उपस्थित थे। पश्चात गौ माता को खिचड़ी खिलाया गया। गोवर्धन पूजा हुई और वही प्रसाद को लोग बड़े श्रद्धा के साथ में ग्रहण किया। शाम को गोधूली बेला गाय के गोबर को गोवर्धन मानकर उसे लोग एक दूसरे के माथे पर टिका की तरह लगाकर आपसी प्रेम एवं भाईचारा का संदेश दिया।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें