जल दिवस पर महानदी का प्रदूषण: पर्यावरण विभाग की लापरवाही उजागर


गोबरा नवापारा, 22 मार्च 2025 - विश्व जल दिवस के मौके पर जहां जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर जागरूकता फैलाने की बात हो रही है, वहीं छत्तीसगढ़ के गोबरा नवापारा में महानदी का बढ़ता प्रदूषण पर्यावरण विभाग की निष्क्रियता को उजागर कर रहा है। विभाग, जिसे पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, महानदी में सीवरेज के गंदे पानी के निर्बाध बहाव को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। इससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में पड़ गया है और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
पर्यावरण विभाग की उदासीनता
महानदी, जो छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा मानी जाती है, आज प्रदूषण की चपेट में है। नदी के किनारे बने नालों से गंदा पानी, झागदार प्रदूषित पदार्थ और अपशिष्ट सीधे नदी में बह रहे हैं। पर्यावरण विभाग को इसकी निगरानी करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा लगता है कि विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है। नदी के पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और इसके लिए जिम्मेदार संस्थाओं पर कार्रवाई करना विभाग का प्राथमिक दायित्व है, लेकिन इनमें से कोई भी कदम उठता नजर नहीं आ रहा।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार पर्यावरण विभाग में शिकायतें दर्ज कीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। एक निवासी, प्रतीक साहू ने कहा, "हमारी नदी हर दिन गंदी हो रही है, लेकिन पर्यावरण विभाग को जैसे इसकी परवाह ही नहीं। जल दिवस पर भी कोई कार्रवाई नहीं दिख रही, यह शर्मनाक है।
नदी और पर्यावरण पर प्रभाव
महानदी में बढ़ता प्रदूषण जलीय जीव-जंतुओं के लिए खतरा बन गया है। मछलियों की संख्या में कमी और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का नष्ट होना इसकी गंभीरता को दर्शाता है। नदी के प्रदूषित पानी का उपयोग करने वाले किसानों और आसपास के गांवों के लोगों में त्वचा रोग, पेट की बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। पर्यावरण विभाग की ओर से न तो प्रदूषण के स्तर की कोई जांच की गई और न ही इसके प्रभावों को कम करने के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई।
विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठ हुए रहा है "महानदी हमारी धरोहर है, और इसे बचाना पर्यावरण विभाग का कर्तव्य है। लेकिन विभाग का मौन इस संकट को और गहरा रहा है। यह उदासीनता किसी अपराध से कम नहीं।" जल दिवस के दिन ली गई तस्वीरों में नदी में बहते कचरे और प्रदूषित पानी को देखकर यह साफ हो जाता है कि विभाग ने अपनी निगरानी और नियंत्रण की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।

जल दिवस का संदेश और विभाग की जिम्मेदारी
विश्व जल दिवस, जो हर साल 22 मार्च को "जल और जलवायु परिवर्तन" जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता के लिए मनाया जाता है, हमें जल संसाधनों की रक्षा की महत्ता याद दिलाता है। लेकिन गोबरा नवापारा में महानदी की स्थिति को देखकर लगता है कि पर्यावरण विभाग इस संदेश से अनजान है। विभाग को चाहिए कि वह नदी के प्रदूषण पर तुरंत कदम उठाए और अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से ले।
महानदी को प्रदूषण से बचाना केवल स्थानीय लोगों का काम नहीं, बल्कि पर्यावरण विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जल दिवस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि जल के बिना जीवन संभव नहीं, और इसे स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है। पर्यावरण विभाग को अपनी लापरवाही छोड़कर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि महानदी फिर से अपनी प्राकृतिक शुद्धता और सुंदरता के साथ बह सके। समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह विभाग की नाकामी का एक और दाग होगा।

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