परीक्षित आप मुक्ति नहीं भक्ति की कमाना करो।


 ग्राम बासनवाही में श्री मद भागवत महापुराण की कथा का आयोजन हो रहा है। कथा के दूसरे दिन कथा वाचक पंडित विकास मिश्रा जी राजिम वाले ने पांडव कुंती द्वारा भगवान कृष्ण की स्तुति और परीक्षित जन्म की कथा बताई। पंडित जी ने कहा कि जब परीक्षित सुखदेव जी महाराज से पूछते हैं की जिसकी मृत्यु निकट हो उसे मुक्ति के लिए कौन सा उपाय करना चाहिए। तब सुखदेव जी महाराज ने परीक्षित से कहा कि परीक्षित आप ने जन्म से पहले ही गर्भ में भगवान श्री कृष्ण की का दर्शन कर लिया है। गर्भ में आकर भगवान ने आपकी रक्षा की थी आपके मां उत्तरा के कहने पर मुक्ति तो आपको मिल ही जाएगी आप यह पूछिए की भक्ति कैसे प्राप्त की जा सकती है। तब परीक्षित जी के द्वारा सुखदेव जी से भक्ति और मुक्ति में अंतर पूछा जाता है। तब सुकदेव जी महाराज परीक्षित से कहते हैं कि मुक्ति में मृत्यु के बाद भगवान का दर्शन होता है जबकि भक्ति में जीते जी भगवान के दर्शन प्राप्त हो जाता है। इसलिए आप भक्ति प्राप्त करने श्री मद भागवत की कथा सुनो। जिनमें भगवान के अवतार और लीलाओं का प्रेम वर्णन है।

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