विकास के दावों पर ग्रहण, 5 माह बाद भी अधर में स्ट्रीट लाइट का काम


गोबरा नवापारा। नगर के विकास के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की स्वीकृति और बड़े-बड़े दावों के बीच स्ट्रीट लाइट लगाने का महत्वपूर्ण कार्य पिछले पांच महीनों से अधर में लटका हुआ है रुक रुक कर ठेकेदार के द्वारा किया जा रहा है। महानदी पुल से कबीर आश्रम तक फोर-लेन सड़क के डिवाइडर पर स्ट्रीट लाइट्स स्थापित करने की परियोजना, जो नगर की सुंदरता और सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, ठेकेदार की लापरवाही और सुस्त रफ्तार के कारण अभी तक पूरी नहीं हो सकी। 
इस परियोजना की शुरुआत चार महीने पहले बड़े उत्साह के साथ हुई थी, लेकिन अब यह कार्य कछुआ गति से चल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ठेकेदार की उदासीनता के कारण न केवल विकास कार्य रुका हुआ है, बल्कि सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है। कुछ स्थानों पर जहां लाइटें लगाई गई हैं, वे भी बंद पड़ी हैं, जिससे रात के समय सड़कों पर अंधेरा छाया रहता है। इससे न केवल आवागमन में असुविधा हो रही है, बल्कि असामाजिक तत्वों के सक्रिय होने का खतरा भी बढ़ गया है। 
स्थानीय व्यापारी ने बताया, "रात में दुकान बंद करने के बाद सड़क पर अंधेरा होने से डर लगता है। स्ट्रीट लाइट्स लगाने का काम शुरू हुआ था, तो उम्मीद जगी थी, लेकिन अब सब ठप पड़ा है। 
इस मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रदीप मिश्रा ने सफाई देते हुए कहा, "संबंधित ठेकेदार को कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। हमने उसे कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। यदि वह समय पर काम पूरा नहीं करता, तो उसे ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।" हालांकि, प्रशासन के इस बयान को लेकर स्थानीय लोग संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि नोटिस देने के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। 

नगर पालिका सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के लिए लाखों रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के कारण न केवल धन का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि जनता की उम्मीदों पर भी पानी फिर रहा है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार और कुछ स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कार्य में देरी हो रही है। 

यह स्थिति न केवल गोबरा नवापारा के विकास कार्यों में बाधा बन रही है, बल्कि सरकार की उन योजनाओं पर भी सवाल उठा रही है, जो नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई हैं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन ठेकेदार पर सख्ती बरतकर इस परियोजना को समय पर पूरा करवाएगा, या यह मामला भी अन्य अधूरी परियोजनाओं की तरह कागजों में दफन हो जाएगा। 
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि नगरवासियों को अंधेरे से मुक्ति मिल सके।

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