छत्तीसगढ़ के हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन



छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर

रायपुर, छत्तीसगढ़ के मशहूर हास्य कवि, व्यंग्यकार और आयुर्वेदाचार्य पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का आज निधन हो गया। 72 वर्षीय डॉ. दुबे का निधन हार्ट अटैक के कारण हुआ। उन्होंने रायपुर के एसीआई अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

डॉ. सुरेंद्र दुबे का जन्म 8 जनवरी 1953 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के बेमेतरा में हुआ था। आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में अपने पेशे के साथ-साथ उन्होंने हास्य और व्यंग्य के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाई। उनकी रचनाओं ने न केवल छत्तीसगढ़ी संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गौरव प्रदान किया, बल्कि सामाजिक कुरीतियों पर तीखे व्यंग्य के माध्यम से समाज को जागरूक भी किया। उनकी कविताएं हास्य के साथ-साथ गहरे सामाजिक संदेशों के लिए जानी जाती थीं।

डॉ. दुबे को 2010 में भारत सरकार द्वारा देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान **पद्मश्री** से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, 2008 में उन्हें **हास्य रत्न पुरस्कार** और 2023 में **ग्राफिक एरा काव्य गौरव सम्मान** जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी नवाजा गया। हाल ही में, 2024 में रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय ने उन्हें **डी.लिट** की मानद उपाधि प्रदान की थी।

उन्होंने पांच किताबें लिखीं और देश-विदेश के अनेक मंचों पर अपनी कविताओं से दर्शकों का मनोरंजन किया। छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए भी वे लंबे समय से प्रयासरत थे। उनकी कविताएं और मंचीय प्रस्तुतियां छत्तीसगढ़ की संस्कृति और भाषा के प्रचार-प्रसार का माध्यम बनीं।

डॉ. दुबे के निधन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, साहित्यकारों और उनके प्रशंसकों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। उनके परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे हैं। अंतिम संस्कार आज शाम रायपुर में किया जाएगा।

डॉ. सुरेंद्र दुबे की कमी साहित्य और कला जगत में हमेशा खलेगी, लेकिन उनकी रचनाएं और विचार हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।

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