डॉ. टी.एल. वर्मा द्वारा छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के विकास और विकसित भारत में छात्रों की भूमिका पर विशेष उद्बोधन


गोबरा नवापारा, श्री कुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय, गोबरा-नवापारा में स्थापना रजत जयंती वर्ष के अंतर्गत एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. टी.एल. वर्मा उपस्थित रहे।
अपने उद्बोधन में डॉ. वर्मा ने सर्वप्रथम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अटल जी के दूरदृष्टिपूर्ण नेतृत्व के कारण ही वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन संभव हो पाया। अटल जी ने नए राज्य को उसकी विशिष्ट पहचान दिलाने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की ठोस नींव रखी।
डॉ. वर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह नीति शिक्षा को रोजगारोन्मुख, बहुविषयक और शोधपरक बनाने का संकल्प है। इससे विद्यार्थी केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि नवाचार करने वाले, उद्यमी और आत्मनिर्भर नागरिक बन सकेंगे।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व में अद्वितीय है। नालंदा और तक्षशिला जैसी प्राचीन शिक्षण संस्थाओं से लेकर आधुनिक विश्वविद्यालयों तक भारत की परंपरा सदैव ज्ञान, मूल्य और संस्कृति पर आधारित रही है।
      डॉ. वर्मा ने कहा कि हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
33 नए महाविद्यालयों की स्थापना से ग्रामीण एवं अंचल क्षेत्रों तक शिक्षा का विस्तार हुआ है। विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 34 “नालंदा परिसर” तथा बिलासपुर में 100 करोड़ की लागत से एजुकेशन सिटी का निर्माण किया जा रहा है। रायपुर, बिलासपुर और अंबिकापुर में नए गर्ल्स कॉलेज खोले गए हैं, जिससे महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़े हैं। रायपुर स्थित पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने “एम.ए. वूमन एंड जेंडर स्टडीज़” जैसा नवीन पाठ्यक्रम प्रारंभ किया है।
    डॉ. वर्मा ने कहा कि “विकसित भारत का सपना छात्रों के योगदान के बिना अधूरा है।” विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, शोध, नवाचार, स्टार्टअप, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा और ईमानदार नागरिकता के माध्यम से भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। डॉ. वर्मा ने छात्रों से आग्रह किया कि वे सदैव अनुशासित, परिश्रमी और सामाजिक रूप से उत्तरदायी बनें। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कक्षा छोड़ते समय पंखा और लाइट के स्विच बंद करें, जल की बचत करें, प्लास्टिक का उपयोग न करें, और समाज में शुचिता बनाए रखते हुए धर्मान्तरण जैसी कुप्रथाओं से दूर रहें।


कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक पीयूषकांत भारद्वाज द्वारा किया गया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.मधुरानी शुक्ला ने डॉ. वर्मा को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और आभार प्रदर्शन भी किया।

इस अवसर पर जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष जीना निषाद, जनभागीदारी समिति के सदस्य अशोक गंगवाल, गोपाल यादव जी, सचिन सचदेव सभापति, पूजा कंसारी सभापति तथा महाविद्यालय परिवार के सहायक प्राध्यापक श्री एस. आर. वड्डे, डॉ. प्रेमेंद्र कुमार उपाध्याय, श्री टिकेश्वर सिंह मरकाम, डॉ. अनीता साहा, श्रीमती रजिया सुल्ताना, श्रीमती श्वेता मिश्रा, श्री पुरुषोत्तम कुमार काबरा, श्री पीयूषकांत भारद्वाज, श्रीमती मोनिका साहू, श्रीमती नंदनी साहू, सुश्री पुष्पलता कँवर सुश्री साक्षी मेश्राम , सभी अतिथि व्याख्याता, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।”

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