श्री कुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय, गोबरा-नवापारा में छत्तीसगढ़ थीम पर पोस्टर, स्लोगन, रंगोली, भाषण एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन


गोबरा-नवापारा। श्री कुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय, गोबरा-नवापारा में स्थापना रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा एवं गौरवशाली धरोहर पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी सृजनात्मक एवं बौद्धिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर पोस्टर प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने चित्रों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला, संस्कृति एवं सामाजिक जीवन को दर्शाया। स्लोगन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने आकर्षक नारों के माध्यम से “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” की भावना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। रंगोली प्रतियोगिता में छात्राओं ने चावल, फूल एवं रंगों से छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोकनृत्य और त्योहारों को जीवंत किया। भाषण प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ की सामाजिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए।

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें प्रतिभागियों से छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और भूगोल से जुड़े रोचक प्रश्न पूछे गए। इनमें प्रमुख प्रश्न थे –

“खरही ला का कहे जाथे?”

“राजीव लोचन मंदिर में जो प्रसाद बाँटे जाथे, ओला का कहे जाथे?”

“चप्पल ला छत्तीसगढ़ी में का कथे?”

“छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा मंत्री के नाम ?”

“एक खांडी मं कतका काठा होथे?”


इन प्रश्नों के उत्तर देकर प्रतिभागियों ने अपनी जानकारी और त्वरित उत्तर देने की क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का संचालन सहायक प्राध्यापक श्री पुरुषोत्तम कुमार काबरा द्वारा किया गया।

विजेता प्रतिभागी इस प्रकार रहे –

पोस्टर प्रतियोगिता : प्रथम – रानी निर्मलकर, द्वितीय – रुखमणि साहू

भाषण प्रतियोगिता : प्रथम – नितलेश साहू, द्वितीय – योगिता रात्रे

रंगोली प्रतियोगिता : प्रथम – हिना साहू, द्वितीय – तुलेश्वरी

स्लोगन प्रतियोगिता : प्रथम – रुखमणि साहू, द्वितीय – वरुण साहू

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता : प्रथम – चैतन्य तारक, द्वितीय – तीजू साहू


प्राचार्य डॉ. मधुरानी शुक्ला ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि –
“छत्तीसगढ़ की थीम पर आयोजित प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों में अपनी माटी, संस्कृति और परंपरा के प्रति गर्व एवं आत्मीयता की भावना उत्पन्न करती हैं।”

पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में जनभागीदारी समिति की अध्यक्ष श्रीमती जीना निषाद, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती ओम कुमारी संजय साहू, नगरपालिका उपाध्यक्ष श्री भूपेंद्र सोनी, श्री नागेंद्र वर्मा भाजपा मंडल अध्यक्ष, श्री राजू रजक विधायक प्रतिनिधि,रोमन लाल साहू,लखन लाल सिन्हा,ईश्वर देवांगन,शिवा साहू,अग्नि यादव,नवीन कन्या महाविद्यालय अध्यक्ष लोमेश्वरी साहू, सम्मिलित हुए और विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती ओम कुमारी संजय साहू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा –
“विद्यार्थी जीवन अनुशासन और परिश्रम से ही सार्थक बनता है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं बल्कि जीवन मूल्यों को आत्मसात करना है। विद्यार्थी यदि सदैव अपने गुरुजनों की आज्ञा का पालन करें, माता-पिता का सम्मान करें और ईमानदारी, निष्ठा तथा अनुशासन को जीवन में अपनाएँ, तो वे निश्चित ही सफल होंगे। शिक्षक का मार्गदर्शन ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।”

वहीं नगरपालिका उपाध्यक्ष श्री भूपेंद्र सोनी ने अपने वक्तव्य में कहा –
“भारतीय ज्ञान परंपरा अद्वितीय है। हमारे शास्त्रों में विद्यार्थी के पाँच लक्षण बताए गए हैं – ‘काक चेष्टा, बक ध्यानम्, श्वान निद्रा, अल्पहारी, गृहत्यागी’। अर्थात विद्यार्थी को कौए जैसी जिज्ञासा, बगुले जैसा गहन ध्यान, कुत्ते जैसी सतर्कता, सीमित भोजन और गृहत्याग जैसी तपस्या अपनानी चाहिए। इन गुणों को जीवन में धारण करने वाला विद्यार्थी ही सच्चे अर्थों में सफल होता है।

भारतीय संस्कृति केवल पूजा-पाठ या रीति-रिवाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला है। इसमें सत्य, अहिंसा, करुणा, कर्तव्यनिष्ठा, बड़ों का सम्मान और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की शिक्षा निहित है। हमारी संस्कृति ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश देकर पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की दृष्टि दी है।

आज के दौर में जब आधुनिकता और भौतिकता तेजी से बढ़ रही है, तब भारतीय संस्कृति ही हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखती है। यदि विद्यार्थी संस्कृति के इन मूल्यों को आत्मसात करेंगे तो वे न केवल अपने परिवार और समाज का गौरव बढ़ाएँगे बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराएँ और लोकजीवन इसकी जीवंत मिसाल हैं।”

निर्णायक मंडल में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों ने अपनी भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के सफल संचालन में महाविद्यालय के सभी सहायक प्राध्यापकों का योगदान रहा –


कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन सहायक प्राध्यापक सुश्री पुष्पलता कँवर द्वारा किया गया तथा अंत में प्राचार्य ने निर्णायकों, अतिथियों एवं विजेताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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