जल संसाधन विभाग की लापरवाही: संस्पेंशन ब्रिज की लाइटें कई महीनों से बंद, दर्शनार्थियों को हो रही परेशानी
राजिम : छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र राजिम, जिसे 'छत्तीसगढ़ का प्रयागराज' कहा जाता है, आजकल विभागीय उदासीनता की भेंट चढ़ रहा है। शासन की महत्वाकांक्षी पर्यटन परियोजना के तहत बने संस्पेंशन ब्रिज पर लगी लाइटें कई महीनों से बंद पड़ी हैं, जिससे मंदिर दर्शन के लिए पहुंचने वाले भक्तों को अंधेरे में भटकना पड़ रहा है। विभाग की इस लापरवाही से न केवल पर्यटकों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि असामाजिक तत्वों की सक्रियता भी बढ़ गई है।
राजिम को धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है, जहां महानदी, पैरी और सोंदूर नदियों का संगम होने से इसे 'छत्तीसगढ़ का प्रयागराज' का दर्जा प्राप्त है। राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चार वर्ष पूर्व राजिम से लोमेश ऋषि आश्रम और श्री कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर तक संस्पेंशन ब्रिज का निर्माण किया गया था। यह ब्रिज न केवल दर्शनार्थियों के लिए सुगम मार्ग प्रदान करता है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लेकिन आज यह ब्रिज अंधकारमय हो चुका है। ब्रिज पर लगी अधिकांश लाइटें खराब या बंद होने से रात के समय यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी पर निर्भर होना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी और दर्शनार्थी इस समस्या से खासी नाराज हैं। राजिम के एक निवासी ने बताया, "यह ब्रिज हमारी धार्मिक यात्रा का हिस्सा है, लेकिन लाइट न होने से रात में मंदिर जाना जोखिम भरा हो गया है। कई बार असामाजिक तत्वों के द्वारा अपराधिक घटनाएं हुई हैं। विभाग क्या कर रहा है?"
इसी तरह, एक युवा पर्यटक ने कहा, "पर्यटन बढ़ाने का दावा तो ठीक है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं भी न दी जाएं तो भला कौन आएगा? यह शासन की छवि को धूमिल कर रहा है।"
जल संसाधन विभाग की ओर से इस ब्रिज का रखरखाव किया जाना है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। ब्रिज निर्माण के चार साल बाद भी लाइटों की मरम्मत या स्थायी समाधान नहीं किया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही से न केवल पर्यटन प्रभावित हो रहा है, बल्कि सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। पिछले कुछ महीनों में ब्रिज पर दो-तीन घटनाएं हो चुकी हैं, जो अंधेरे का फायदा उठाकर की गईं।
शासन से अपेक्षा है कि जल संसाधन विभाग की इस लापरवाही पर तुरंत संज्ञान लें और ब्रिज को रोशन करें, ताकि छत्तीसगढ़ का प्रयागराज अपनी चमक बरकरार रख सके। अन्यथा, यह मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
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