राजिम कुंभ कल्प मेला 2026: 20 फीट ऊंचाई पर बिना सुरक्षा उपकरण के मजदूरों की जान से खिलवाड़ ! ठेकेदार की घोर लापरवाही उजागर l


राजिम -: राजिम में आगामी दिनों में राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। 1 फरवरी से 15 फरवरी तक आयोजित होने वाले इस भव्य धार्मिक आयोजन को लेकर नया मेला मैदान बड़े-बड़े डोम, पंडाल और अस्थायी संरचनाओं से आकार ले रहा है।

 संभागायुक्त, कलेक्टर, पर्यटन मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी लगातार निरीक्षण कर समय पर काम पूरा करने के निर्देश दे रहे हैं।लेकिन इन्हीं चमकदार तैयारियों के पीछे एक डरावनी और शर्मनाक सच्चाई सामने आई है।

बिना सुरक्षा 20 फीट ऊपर मजदूरी, मौत को खुला न्योता
नए मेला मैदान में निर्माण कार्य कर रहे मजदूर 20 फीट से अधिक ऊंचाई पर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम करने को मजबूर हैं न हेलमेट, न सेफ्टी बेल्ट, न हार्नेस, न ही कोई जीवन रक्षक रस्सी l

इतनी ऊंचाई पर ज़रा सा संतुलन बिगड़ना सीधे मौत को न्योता देने जैसा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधी आपराधिक उदासीनता है।

हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई मजदूर ऊंचाई से गिरकर गंभीर रूप से घायल होता है या जान चली जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

इवेंट मैनेजमेंट कंपनी
ठेकेदार?या फिर प्रशासन, जिसकी नाक के नीचे यह सब हो रहा है?
निरीक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित?
रोज़ाना बड़े अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद मजदूरों की यह हालत प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
क्या निरीक्षण केवल फोटो और फाइलों तक सीमित हैं?
क्या मजदूरों की जान की कीमत शून्य है?

श्रम कानूनों की खुली धज्जियां

श्रम कानून स्पष्ट रूप से कहते हैं कि ऊंचाई पर कार्य करने वाले श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण देना अनिवार्य है। इसके बावजूद ठेकेदार खुलेआम नियमों को ताक पर रखे हुए हैं और प्रशासन मौन दर्शक बना हुआ है।

लोगों ने कहा कि 
सभी निर्माण स्थलों पर तत्काल सुरक्षा मानकों का पालन कराया जाए

मजदूरों को हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, जूते व हार्नेस उपलब्ध कराए जाएं

लापरवाह ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो

रोज़ाना सुरक्षा निरीक्षण की लिखित रिपोर्ट तैयार की जाए

मजदूर भी इंसान हैं, मेले की नींव वही हैं

कुंभ कल्प जैसे विशाल आयोजन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा ज़रूरी है, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि इस भव्य आयोजन की नींव मजदूरों के पसीने और जोखिम पर टिकी है।
एक मजदूर की जान भी उतनी ही कीमती है, जितनी मेले की भव्यता।
अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में बदल सकती है—और तब सिर्फ बयानबाज़ी ही बची रहेगी।
अब सवाल साफ है—

क्या प्रशासन जागेगा, या किसी अनहोनी का इंतज़ार किया जा रहा है?

क्या कहते हैं राजिम अनुविभागीय अधिकारी विशाल महाराणा ने कहा कि मजदूरों की सुरक्षा का मामला है इवेंट कंपनी को अवगत करता हूं, ताकि इस पर ध्यान दे l

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