करोड़ों का सस्पेंशन ब्रिज 'अंधेरे का साम्राज्य'! जल संसाधन विभाग की 'चकाचौंध' उदासीनता: श्रद्धालु मोबाइल टॉर्च से 'प्रकाश पर्व' मना रहे!


राजिम (गरियाबंद), शासन ने करोड़ों रुपये खर्च करके त्रिवेणी संगम पर भव्य सस्पेंशन ब्रिज तो बना दिया, लेकिन कई महीनों से लाइट बंद? या जानबूझकर 'डार्क टूरिज्म' को बढ़ावा दे रहे हैं? नववर्ष पर हजारों श्रद्धालु राजिम पहुंचे तो ब्रिज पर ऐसा घनघोर अंधेरा कि लगे मानो विभाग ने 'बिजली बचाओ अभियान' यहां से शुरू कर दिया हो!
श्रद्धालु क्या करें? मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर ब्रिज पार कर रहे हैं – जैसे कोई हॉरर फिल्म का सीन हो! कोई गिरे, कोई फिसले, तो बड़ी दुर्घटना हो जाएगी। लेकिन मंत्री जी कहां हैं? जिम्मेदार अधिकारी कहां हैं? सब 'अंधेरे में तीर चला' रहे हैं। शिकायत की गई, अवगत कराया गया, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं। जनप्रतिनिधि तो जैसे 'ब्रिज की लाइट' ही नहीं, अपनी जिम्मेदारी की लाइट भी ऑफ कर बैठे हैं।
अरे भाई, राजिम कुंभ में लाखों आएंगे, माघ मेला में भीड़ उमड़ेगी। तब क्या? टॉर्च लेकर नदी पार करेंगे? जल संसाधन विभाग की यह 'उदासीनता' नहीं, 'महाउदासीनता' है, जो शासन की छवि को 'ब्लैकआउट' कर रही है। अगर हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन? विभाग कहेगा – 'बिजली कंपनी की गलती'! बिजली कंपनी कहेगी – 'बिल नहीं भरा'! और मंत्री जी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलेंगे – 'जांच कमेटी गठित कर दी गई है'!
स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं: मंत्री जी, जल्दी लाइट जलाओ, वरना जनता 'आंदोलन की रोशनी' दिखा देगी!

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