अमेरिका-भारत व्यापार समझौता रद्द करने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन,किसानों ने संयुक्त घोषणा की प्रतियाँ जलाकर किया विरोध





गरियाबंद , 12 फरवरी 2026 को देश भर के किसान संगठनों द्वारा धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन के माध्यम से अमेरिका-भारत व्यापार समझौता को रद्द करने की मांग किया गया। इसी तरताम्य में भारतीय किसान यूनियन जिला इकाई गरियाबंद द्वारा राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर गरियाबंद को ज्ञापन सौंप अमेरिका-भारत व्यापार समझौता को रद्द करने की मांग किया है इससे पहले किसानों ने भारत-अमरीका संयुक्त घोषणा की प्रतियाँ जलाया. 

प्रतिनिधि मंडल में शामिल भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही, जिला महासचिव योगेंद्र साहू, जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम, राजेन्द्र नेताम, भूनूराम साहू, उत्तम कुमार साहू, पोषण कुमार ने ज्ञापन में कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौता किसान विरोधी कदम है। भारत की आत्मा गांव में बसती है लेकिन जिस तरह से यह व्यापार समझौता सामने आया है, उससे सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसानों की सहमति ली गई है? क्या उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है? ज्ञापन में तर्क दिया है कि-

1. सस्ती विदेशी उपज से भारतीय किसान तबाह होंगेः- अमरिका की खेती भारी सब्सिडी पर आधारित, पूरी तरह मशीनीकृत और बड़े कॉर्पोरेट फार्म मॉडल पर आधारित है अगर भारत सोयाबीन, मक्का, गेंहूँ, डेयरी उत्पाद, दालों पर आयात शुल्क घटाता है तो सस्ती अमेरिकी फसल भारतीय मंडियों आयेंगी। इससे भारतीय किसान जो पहले ही एममसपी की लड़ाई लड़ रहा है, वह इस प्रतिस्पर्धा में कैसे टिकेगा?

2. डेयरी सेक्टर पर सीधा हमलाः भारत का डेयरी मॉडल छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित, सहकारी व्यवस्था पर टिका हुआ है। आसानी से अमेरिकी डेयरी उत्पादों की प्रवेश होने से लाखों दुग्ध उत्पादक परिवार प्रभावित होंगे जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा आघात है।

3. एमएसपी और खाद्य सुरक्षा पर खतराः- व्यापार संतुलन के नाम पर भारत के ऊपर कृषि सब्सिडी कम करने, सार्वजनिक खरीद प्रणाली को कमजोर करने का दबाव होने से एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य आत्मनिर्भरता पर प्रहार होगा।

4. बीज और कॉर्पोरेट नियंत्रणः अमेरिकी कंपनियां पेटेंट आधारित बीज, बौध्दिक संपदा अधिकार के जरिये अपने किसानों को आत्मनिर्भर बनाती है जबकि भारत में आज भी किसान अपनी परंपरिक बीज संचय व संरक्षण पर निर्भर है। बीज पर कंपनियों के हाथ में आने से भारतीय किसान अपनी परंपरिक बीज स्वतंत्रता व नियंत्रण खो देगा।

इसलिए यह समझौता केवल व्यापार का मामला नहीं है बल्कि यह किसान की आय, ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा, राष्ट्रीय आर्थिक स्वायत्तता का प्रश्न है। इसलिए अमेरिका-भारत व्यापार समझौता को रद्द किया जाये।

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