नवापारा रेलवे क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर मिट्टी परीक्षण के लिए खोद दिया सड़क के बीच गढ्ढा,अब खुला छोड़ दिया

नवापारा-राजिम। नवापारा रेल्वे क्रॉसिंग क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण से पहले मिट्टी परीक्षण का कार्य शुरू तो हो गया है, लेकिन यह प्रक्रिया अब लोगों की चिंता का कारण बनती जा रही है। ठेकेदार के मजदूरों द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय चौक से चंपारण चौक तक नेशनल हाइवे सड़क के बीच लगभग सोलह स्थानों पर गड्ढे खोदकर मिट्टी परीक्षण किया जाना है। इनमें से तीन स्थानों पर परीक्षण पूरा भी हो चुका है, लेकिन सिर्फ एक स्थान के गढ्ढा को पाटा गया जबकि दूसरा स्थान का गढ्ढा जो बस स्टेण्ड का सामने का हिस्सा पड़ता है नेशनल हाइवे है इसे खुला छोड़ दिया गया है जिसे आप इस तस्वीर में देख सकते है। इस गड्ढे को खुला छोड़ दिया गया है, जिससे रात में बड़ी दुर्घटना की आशंका उत्पन्न हो गई है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, जिन स्थानों पर खुदाई की गई है, वहां न तो सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही चेतावनी संकेतक लगाए गए हैं। राहगीरों, दुपहिया चालकों और स्कूली बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक बन गई है। दिन में तो किसी तरह लोग संभलकर निकल रहे हैं, लेकिन रात के समय खुले गड्ढे गंभीर हादसों को न्योता दे रहे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मौके पर न तो कोई जिम्मेदार इंजीनियर दिखाई दे रहा है और न ही ठेकेदार का कोई अधिकृत प्रतिनिधि। केवल मजदूरों के भरोसे मिट्टी परीक्षण का कार्य कराया जा रहा है। तकनीकी और संवेदनशील माने जाने वाले इस कार्य में विशेषज्ञों की अनुपस्थिति ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। नागरिकों का सवाल है कि यदि किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? व्यापारियों और आसपास के रहवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मिट्टी परीक्षण आवश्यक प्रक्रिया है, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। गड्ढों को तत्काल भरने या सुरक्षित घेराबंदी करने के साथ चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए। ज्ञात हो कि नवापारा रेलवे क्रॉसिंग क्षेत्र पहले से ही यातायात दबाव और जाम की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में बिना सुरक्षा इंतजाम के की जा रही खुदाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। स्थानीय लोगों ने कहा है कि यदि शीघ्र सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी इस प्वाइंट पे दुर्घटना घट सकती है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और ठेकेदार इस गंभीर लापरवाही पर कितनी शीघ्रता से संज्ञान लेते हैं और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। 

बड़ा सवाल यह है कि मिट्टी परीक्षण के लिए क्या लोक निर्माण विभाग/ नेशनल हाईवे से अनुमति ली गई ? पं दीनदयाल उपाध्याय चौक से लेकर चंपारण चौक तक सड़क के दोंनो तरफ कितना गड्ढा खोदा जाना है ! किस प्वाइंट पर खोदा जाना है ! जहां खोदने का काम शुरू कर दिया गया है उस प्वाइंट को किसने? सुनिश्चित किया! किस आधार पर किया गया! किसके कहने से प्वाइंट बनाया गया ! यह सवाल लोगो के जेहन में रह-रहकर आ रहा है। कारण कि अब तक नेशनल हाईवे / लोक निर्माण विभाग के कोई भी जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर सामने नही आया है इससे रेल्वे क्रासिंग के दोनो तरफ के रहवासियो और व्यवसायियो का गुस्सा भड़का हुआ है।

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