बोरसी का युवा गणेश: नौकरी छोड़कर 'सोने की चिड़िया' भारत का भ्रमण
राजिम, क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत बोरसी का युवा गणेश निषाद इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। मीरा नगरी (राजस्थान) पहुंचकर उसने जो जज्बा दिखाया है, वह युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है। गणेश ने गुजरात के अहमदाबाद में अच्छी नौकरी छोड़कर भारत दर्शन का सफर चुना है। अब वह 'सोने की चिड़िया' कहे जाने वाले भारत की विविधता, संस्कृति और धरोहरों को साइकिल या पैदल यात्रा से देख रहा है।
गणेश निषाद मूल रूप से बोरसी गांव के रहने वाले हैं। निषाद समुदाय से जुड़े इस युवा ने अहमदाबाद में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में काम किया। अच्छी कमाई और स्थिर जीवन के बावजूद देश को करीब से देखने की ललक उनके मन में हमेशा रही। दिन-रात की मेहनत के बीच भी भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विविधता उन्हें आकर्षित करती रही। आखिरकार उन्होंने नौकरी त्याग दी और भारत भ्रमण पर निकल पड़े।
उनका सफर गुजरात से शुरू हुआ। अहमदाबाद से रवाना होकर उन्होंने पहले गुजरात के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण पूरा किया। अब वह राजस्थान में मीरा नगरी पहुंच चुके हैं। गणेश ने बताया कि उनका प्लान दो-तीन साल में पूरे देश का भ्रमण पूरा करने का है। उन्होंने कहा, “भारत सोने की चिड़िया है। इसके हर कोने में अलग-अलग रंग, संस्कृति, इतिहास और आस्था है। नौकरी छोड़कर यह सफर चुनना आसान नहीं था, लेकिन देश देखने की चाहत ने मुझे मजबूर कर दिया।”
गणेश अपनी यात्रा के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नियमित साझा करते हैं। उनके पोस्ट खूब वायरल हो रहे हैं। लोग उनकी हिम्मत की सराहना कर रहे हैं। राजिम क्षेत्र के लोग विशेष रूप से गर्व महसूस कर रहे हैं। बोरसी के ग्रामीणों का कहना है कि गणेश जैसे युवा पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। राजिम, जो महानदी के किनारे स्थित है और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, से निकला यह युवा अब पूरे भारत को जोड़ने का काम कर रहा है।
यह यात्रा सिर्फ घूमने की नहीं, बल्कि सीखने की भी है। गणेश विभिन्न राज्यों की भाषा, खान-पान, लोक संस्कृति, धार्मिक स्थलों और आम जीवन से रूबरू हो रहे हैं। गुजरात से राजस्थान तक का सफर पूरा करने के बाद अब वे आगे हरियाणा, पंजाब या अन्य राज्यों की ओर बढ़ सकते हैं। उनके अनुसार, भारत की एकता इसी विविधता में है। यात्रा के दौरान वे साधारण रहन-सहन अपनाए हुए हैं और बजट यात्रा कर रहे हैं, जिससे आम युवाओं को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
राजिम क्षेत्र में गणेश की इस मुहिम को लेकर चर्चा जोरों पर है। स्थानीय युवा उनसे प्रेरित होकर खुद भी कुछ नया करने की सोच रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि नौकरी की सुरक्षा छोड़कर सपनों का पीछा करना सच्ची देशभक्ति है। गणेश की यात्रा न सिर्फ व्यक्तिगत अनुभव है, बल्कि यह दिखाती है कि छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव बोरसी का युवा भी राष्ट्र की धरोहरों को करीब से जानने का जज्बा रखता है।
सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स बढ़ रहे हैं। लोग कमेंट्स में शुभकामनाएं दे रहे हैं और यात्रा के अगले पड़ाव के बारे में पूछ रहे हैं। गणेश का संदेश साफ है — “भारत को जानो, भारत को देखो, भारत से प्यार करो।” उनकी यह यात्रा युवा पीढ़ी को प्रेरित कर रही है कि सपनों को पूरा करने के लिए जोखिम उठाना जरूरी है।
बोरसी के इस साहसी युवा गणेश निषाद की कहानी छत्तीसगढ़ के राजिम क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। मीरा नगरी से शुरू हुए इस सफर की हर मंजिल उनके गांव और पूरे क्षेत्र को नई पहचान दे रही है। उम्मीद है कि दो-तीन साल के प्लान के अनुसार वे पूरे भारत का सफलतापूर्वक भ्रमण पूरा करेंगे और अपनी अनुभवों को दूसरों तक पहुंचाएंगे।
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