पुरानी परंपरा बचाने का संदेश लेकर निकली बारात, कपसीडीह से मुड़तराई पहुंचे बाराती
राजिम। क्षेत्र में अपनी पुरानी परंपरा और संस्कृति को बचाने का अनूठा संदेश देते हुए कपसीडीह गांव से मुड़तराई के लिए एक बारात रवाना हुई। दूल्हा पवन ध्रुव पिता रमेश्वर ध्रुव की इस बारात का उद्देश्य केवल विवाह संपन्न कराना नहीं, बल्कि लुप्त होती लोक संस्कृति और रीति-रिवाजों के प्रति लोगों को जागरूक करना भी था।
बारात में पारंपरिक वाद्य यंत्रों, लोकगीतों और छत्तीसगढ़ी परिधान के साथ बाराती शामिल हुए। युवाओं ने गांव की पुरानी बारात प्रथा को जीवित रखते हुए नाच-गाने और हंसी-खुशी के माहौल में यात्रा पूरी की। बारात का जगह-जगह ग्रामीणों ने स्वागत किया।
इस पहल को लेकर ध्रुव परिवार एवं युवा साथियों ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी जड़ों से कटते जा रहे हैं। विवाह जैसे पवित्र संस्कार में भी अब दिखावा बढ़ गया है। हमारी कोशिश है कि नई पीढ़ी को बताया जाए कि परंपरागत तरीके से भी विवाह का उत्सव उतना ही भव्य और आनंददायक हो सकता है।
बारात में रमेश्वर ध्रुव, चैनसिंग ध्रुव, रोशन साहू, कामता साहू, श्री हरख ध्रुव, दयाराम, कोमल तारक, सुरेंद्र साहू, कृष्ण साहू, दुष्यंत, जनसेवक मेघराज साहू, नंदकुमार सहित बड़ी संख्या में परिजन एवं ग्रामीण शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि संस्कृति ही हमारी पहचान है और इसे बचाना हर नागरिक का दायित्व है।
मुड़तराई पहुंचने पर वधू पक्ष ने भी पारंपरिक रीति से बारात का स्वागत किया। इस अनूठी पहल की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
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