शिक्षा और समरसता से ही सशक्त समाज का निर्माण संभव — माधुरी साहू
गरियाबंद, जिले के आदिम जनजाति एवं अनुसूचित जाति पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती के अवसर पर “समरसता मिलन एवं स्वल्पाहार” कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
यह कार्यक्रम भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं प्रेरक मार्गदर्शन में निर्देशित था| जिसका उद्देश्य डॉ. अंबेडकर जी के समरसता, समानता एवं शिक्षा आधारित समाज के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
इस अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश सह–समन्वयक माधुरी साहू एवं जिला अध्यक्ष बिंदु सिन्हा की विशेष उपस्थिति रही। साथ ही छात्रावास की अधीक्षक गैन्दी ठाकुर की सक्रिय भूमिका एवं कुशल प्रबंधन कार्यक्रम की सफलता में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। कार्यक्रम में भाजपा महिला मोर्चा के अन्य पदाधिकारी गणों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक ऊर्जा एवं प्रभाव प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान छात्रावास में निवासरत सैकड़ों बालिकाओं के साथ आत्मीय एवं प्रेरणादायक संवाद स्थापित किया गया, जिसमें शिक्षा, आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक समरसता के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर जी के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा ही सशक्त समाज की आधारशिला है और यही उनके सपनों के समतामूलक भारत के निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है।
इस अवसर पर बालिकाओं को न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया गया, बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास एवं उच्च नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश भी दिया गया। उपस्थित अतिथियों ने कहा कि आज की बेटियां केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण की सशक्त आधारशिला हैं, और उनका सशक्तिकरण ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय करेगा।
छात्रावास परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का वातावरण निर्मित किया, जहां बालिकाओं ने भी अपने विचार साझा करते हुए शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह संवाद न केवल प्रेरणादायक रहा, बल्कि उनके भीतर आगे बढ़ने का उत्साह और दृढ़ संकल्प भी विकसित करने में सहायक सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने समरसता, एकता एवं भाईचारे का संदेश आत्मसात करते हुए स्वल्पाहार ग्रहण किया। आपसी सहयोग, सौहार्द एवं सामूहिक सहभागिता का यह दृश्य कार्यक्रम की मूल भावना को पूर्ण रूप से साकार करता नजर आया।
यह आयोजन न केवल डॉ. अंबेडकर जी के आदर्शों को जीवंत करने का सशक्त माध्यम बना, बल्कि समाज में समानता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक एवं सार्थक पहल के रूप में भी स्थापित हुआ।
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