डबल इंजन सरकार में भी पांच माह से अटकी पेंशन, नगर में 2908 बुजुर्ग-विधवा-दिव्यांग मोहताज


गोबरा नवापारा। डबल इंजन की सरकार का दावा करने वाली सरकार में ही नगर पालिका परिषद् गोबरा नवापारा के 2908 गरीब, असहाय बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को विगत पांच महीनों से पेंशन का एक भी रुपया नसीब नहीं हुआ है। सामाजिक सहायता की 6 योजनाओं से जुड़े ये हितग्राही अब दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।  

नगर पालिका के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय इंदिरा गांधी वृद्धा पेंशन के 1257, विधवा पेंशन के 474, दिव्यांग पेंशन के 225, सुखद सहारा पेंशन के 585, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 365 और मुख्यमंत्री पेंशन के 2 हितग्राही हैं। सभी को 500 रुपये प्रतिमाह मिलना तय है, जिसमें केंद्र और राज्य का अंशदान शामिल है। कागजों में तो हर माह राशि जारी होनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जनवरी 2026 से अब तक किसी के खाते में फूटी कौड़ी तक नहीं आई।  

पेंशन न मिलने से बुजुर्ग दवा तक नहीं खरीद पा रहे। विधवा महिलाएं राशन और बच्चों की पढ़ाई के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाने को मजबूर हैं। दिव्यांगजन जीविकोपार्जन के संकट से जूझ रहे हैं। रोज जनपद और नगर पालिका कार्यालय के चक्कर काटने पर भी जवाब मिलता है कि “ऊपर से बजट नहीं आया”।  

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही दल की डबल इंजन सरकार है, तो फिर गरीबों की पेंशन आखिर कहां अटक गई? योजनाओं का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार में पांच-पांच महीने तक पेंशन न मिलना सीधे-सीधे गरीबों के हक पर कुठाराघात है।  

हितग्राहियों का कहना है कि बुढ़ापे में यही 500 रुपये सहारा थे। अब वह भी छिन गया तो जिएं कैसे? कई बुजुर्गों ने बताया कि वे खाली पेट सोने को मजबूर हैं। सरकार एक तरफ विकास का दावा करती है, दूसरी तरफ सबसे कमजोर वर्ग को उसके हक से वंचित कर रही है।  

यदि डबल इंजन की सरकार में ही गरीबों की पेंशन पांच माह तक अटक सकती है, तो यह व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। हितग्राही तत्काल बकाया भुगतान की मांग कर रहे हैं, वरना आंदोलन की चेतावनी दी है।

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