सुशासन तिहार में 'बाल श्रम' का तमाशा: मंत्री-कलेक्टर के सामने नाबालिग परोसते रहे नाश्ता-शरबत, कानून की उड़ी धज्जियां
गरियाबंद: छत्तीसगढ़ सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम 'सुशासन तिहार' में ही सुशासन की पोल खुल गई। गरियाबंद जिले के ग्राम पोखरा में आयोजित शिविर में व्यवस्था की कमान नाबालिग बच्चों के हाथों में दिखी। प्रभारी मंत्री, विधायक, कलेक्टर समेत तमाम बड़े अधिकारियों की मौजूदगी वाले मुख्य मंच के ठीक सामने बच्चे नाश्ता और शरबत परोसते नजर आए।
सुशासन तिहार का मकसद जनता की समस्याओं का मौके पर समाधान करना है। बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत यह सामने आई कि जिन बच्चों के हाथ में किताब-कलम होनी चाहिए, उनके हाथ में सरकारी कार्यक्रम में शरबत की ट्रे थमा दी गई। मंच पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि यह सब देखते रहे, लेकिन किसी ने रोकना जरूरी नहीं समझा।
विडंबना यह है कि एक तरफ प्रशासन बाल श्रम कानून का हवाला देकर निजी संस्थानों पर कार्रवाई करता है, वहीं सरकारी आयोजन में ही कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत 14 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का काम कराना दंडनीय अपराध है।
सवाल यह उठता है कि जब सरकार के सबसे बड़े जनसंपर्क अभियान में ही बच्चों से काम लिया जा रहा है, तो आम लोगों को क्या संदेश जाएगा? क्या अफसरों को कार्यक्रम की चमक-दमक दिखाने के लिए बाल श्रम कानून याद नहीं रहा?
इस घटना ने सुशासन तिहार के नाम पर हो रहे आयोजन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि मुख्य मंच से सुशासन का पाठ पढ़ाने वाले जिम्मेदार इस 'कुशासन' पर क्या कार्रवाई करते हैं।
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