गोबरा नवापारा में 'ज्ञान भारतम्' के तहत दुर्लभ ताम्र पत्र व पांडु लिपि का सर्वेक्षण, डिजिटल संरक्षण से बचेगी विरासत



गोबरा नवापारा। केंद्र सरकार के 'ज्ञान भारतम्' मिशन के अंतर्गत गोबरा नवापारा में दुर्लभ पांडुलिपियों और ताम्र पत्रों का महत्वपूर्ण सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान नगर के प्रबुद्ध परिवारों द्वारा पीढ़ियों से सहेजी गई अमूल्य ज्ञान धरोहरें सामने आईं। इनमें ब्रह्म दत्त शर्मा, जीवन लाल बोथरा और राम आधार शर्मा के परिवारों के पास सुरक्षित ताम्र पत्र एवं पांडु लिपि प्रमुख हैं। भारत सरकार ने 2025-26 के यूनियन बजट में 'ज्ञान भारतम्' मिशन की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य देशभर में बिखरी 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों, ताड़पत्र, भोजपत्र व ताम्रपत्रों का संरक्षण, डिजिटाइजेशन और अभिलेखीकरण करना है। इन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में सुरक्षित किया जा रहा है ताकि शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके। जिला प्रशासन एवं कलेक्टर के मार्गदर्शन में गोबरा नवापारा नगर पालिका की टीम ने सर्वेक्षण अभियान चलाया। 
मुख्य नगर पालिका अधिकारी लवकेश पैकरा और टीम में धर्मेंद्र साहू, फानेंद्र साहू ने घर-घर जाकर पांडुलिपियों की पहचान, जियो-टैगिंग और सूचीकरण का कार्य किया। 'ज्ञान भारतम्' ऐप के माध्यम से इन धरोहरों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। पांडु लिपि और ताम्र पत्रों में तत्कालीन समाज, धार्मिक मान्यताओं, शासन व्यवस्था और दान प्रथा का उल्लेख मिलता है। इनमें इतिहास, औषधि विधि, जड़ी-बूटी, संगीत, नृत्य और तंत्र-मंत्र जैसे विषयों का ज्ञान समाहित है। परिवारों ने बताया कि पूर्वजों से मिली इस विरासत को उन्होंने तिजोरी में सुरक्षित रखा था। 
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पांडुलिपियों का स्वामित्व पूर्णतः धारकों के पास ही रहेगा। केवल डिजिटलीकरण कर उन्हें संरक्षित किया जाएगा। यह पहल विकसित भारत @2047 के लक्ष्य और डिजिटल इंडिया विजन को मजबूत करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, पांडुलिपियां भारत की ज्ञान परंपरा और संस्कृति का भंडार हैं। इनका संरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए अनमोल उपहार साबित होगा।

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