शाला प्रवेश उत्सव से पहले बदहाल शिक्षा का मंदिर: 142 साल पुराने स्कूल की जर्जर हालत पर उठे सवाल
गोबरा नवापारा। एक ओर प्रदेश सरकार 16 जून से शाला प्रवेश उत्सव मनाने की तैयारी में जुटी हुई है, वहीं नगर का सबसे पुराना शिक्षा मंदिर अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। वर्ष 1884 से संचालित प्राथमिक शाला बड़ाईपारा आज 142 वर्षों बाद ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है कि भवन को देखकर यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि यह स्कूल है या कोई पुरातात्विक धरोहर।
नगर के प्रमुख मार्ग सदर रोड स्थित इस विद्यालय परिसर में प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय दो पालियों में संचालित होते हैं, जहां लगभग 400 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। लेकिन विडंबना यह है कि पूरे स्कूल परिसर में केवल तीन कक्ष ही उपयोग योग्य बचे हैं, जबकि शेष कमरों की हालत बेहद जर्जर और खतरनाक हो चुकी है।
2017-18 से हो रहा पत्राचार, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था
विद्यालय के शिक्षकों द्वारा वर्ष 2017-18 से लगातार पत्राचार कर उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया जा रहा है। इसके बावजूद आज तक न तो नए भवन का निर्माण हो पाया और न ही पुराने भवन की समुचित मरम्मत की गई।
जर्जर भवन में बन रहा मध्यान्ह भोजन
स्थिति इतनी चिंताजनक है कि बच्चों के लिए बनने वाला मध्यान्ह भोजन भी जर्जर भवन में तैयार किया जा रहा है, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार जिस शाला प्रवेश उत्सव को उत्साहपूर्वक मनाने की बात कर रही है, वहां नए विद्यार्थियों का स्वागत आखिर किस माहौल में होगा?
इसी स्कूल से निकले शिक्षक, इंजीनियर और डॉक्टर
यह वही ऐतिहासिक विद्यालय है जहां से पढ़कर अनेक शिक्षक, इंजीनियर, डॉक्टर और विभिन्न क्षेत्रों में सेवा दे रहे प्रतिष्ठित नागरिक निकले हैं। लेकिन आज उसी विद्यालय की दुर्दशा शिक्षा व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही है।
संकुल केंद्र भी, फिर भी उपेक्षा बरकरार
सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी विद्यालय परिसर में संकुल केंद्र भी संचालित होता है। इसके बावजूद वर्षों से स्कूल की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बड़ा सवाल
क्या इस वर्ष भी बच्चे इसी जर्जर और असुरक्षित भवन में पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे? क्या शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान केवल कागजी योजनाओं और समारोहों तक सीमित है? आखिर वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर शिक्षा की बातें करने वाले जिम्मेदार लोग नगर के इस ऐतिहासिक विद्यालय की बदहाली को कब तक नजरअंदाज करते रहेंगे?
शाला प्रवेश उत्सव की तैयारियों के बीच बड़ाईपारा स्कूल की जर्जर तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही हैं।
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