जौदा धान संग्रहण केंद्र में पीएफ घोटाले की आशंका! ठेकेदार के साथ विभागीय भूमिका पर भी उठे सवाल, जांच की मांग तेज
रायपुर /अभनपुर -:धान संग्रहण केंद्र जौदा में श्रमिकों की पीएफ राशि जमा नहीं होने के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। कई महीनों से अपनी मेहनत की कमाई और भविष्य निधि (पीएफ) राशि का इंतजार कर रहे श्रमिकों ने अब ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
श्रमिकों का आरोप है कि 50 से अधिक मजदूरों की पीएफ राशि आज तक उनके खातों में जमा नहीं की गई, जबकि नियमों के अनुसार मजदूरों के वेतन से कटौती होने पर निर्धारित समय में पीएफ जमा करना अनिवार्य है।
श्रमिकों का कहना है कि पीएफ भुगतान की मांग को लेकर पूर्व में हड़ताल की गई थी। उस दौरान ठेकेदार ने लिखित आश्वासन दिया था कि 15 दिनों के भीतर सभी लंबित पीएफ राशि जमा कर दी जाएगी। लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी श्रमिकों को उनका अधिकार नहीं मिला।
मामले में अब जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) कार्यालय की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है। श्रमिकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ठेकेदार को भुगतान विभागीय प्रक्रिया के तहत किया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों की निगरानी और जिम्मेदारी से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इतनी लंबी अवधि तक पीएफ राशि जमा नहीं होने की जानकारी विभाग को क्यों नहीं हुई और यदि हुई तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
मीडिया द्वारा पक्ष जानने के लिए जिला विपणन अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया।
कार्यालय पहुंचकर जानकारी लेने की कोशिश भी की गई, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। वहीं कार्यालय स्तर पर यह बताया गया कि मामला ठेकेदार के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। हालांकि श्रमिकों का सवाल है कि यदि भुगतान और कार्यों की निगरानी विभागीय स्तर पर होती है तो जवाबदेही केवल ठेकेदार तक सीमित कैसे हो सकती है?
सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि पूरे मामले में अन्य वित्तीय अनियमितताओं की भी आशंका जताई जा रही है। श्रमिक नेताओं ने दावा किया है कि कुछ ऐसे नामों की भी जांच होनी चाहिए जिनके संबंध में कार्य नहीं करने के बावजूद भुगतान होने की चर्चा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
श्रमिकों ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि पीएफ भुगतान, मजदूरी भुगतान, ठेका व्यवस्था और संबंधित विभागीय कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो परसदा में आयोजित सुशासन तिहार में सामूहिक शिकायत दर्ज कर बड़े आंदोलन का ऐलान किया जाएगा।
विषय को लेकर जिला कलेक्टर रायपुर एवं श्रम अधिकारी को ज्ञापन सौंपा कर अवगत कराया गया है अब देखना होगा कि आखिकार उच्च अधिकारियों के द्वारा क्या कुछ श्रमिकों के इस समस्या का समाधान होता है या नहीं?
बड़े सवाल
▶ आखिर श्रमिकों की पीएफ राशि जमा क्यों नहीं हुई?
▶ क्या विभागीय निगरानी व्यवस्था पूरी तरह विफल रही?
▶ पीएफ भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार कौन?
▶ क्या पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी?
▶ क्या कथित वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी भुगतान की भी जांच होगी?
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