गरियाबंद में औषधि विभाग का औचिक निरीक्षण, ड्रग इंस्पेक्टर की अपील


गरियाबंद। राज्य के औषधि नियंत्रक रायपुर निर्देशानुसार खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यह औचिक निरीक्षण अन्य प्रदेश में जांच में यह खुलासा हुआ है कि बाजार में ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, दर्द निवारक, एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जी और बच्चों के सिरप जैसी जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर नकली अवशेष मिलाकर दवाएं बेची जा रही थीं। इस अवैध कारोबार से करोड़ों रुपए का वारा-न्यारा किया जा रहा था। इसी कड़ी में राज्य के औषधि नियंत्रक रायपुर निर्देशानुसार औषधि प्रशासन विभाग, जिला गरियाबंद के औषधि निरीक्षक धर्मवीर सिंह ध्रुव के नेतृत्व में जिले भर के मेडिकल स्टोरों में लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य नकली दवा नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। औषधि निरीक्षक धर्मवीर सिंह ध्रुव ने लोगों से अपील की है कि दवा खरीदते समय निम्न बातों का विशेष ध्यान रखें दवा हमेशा अधिकृत और लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही खरीदें। दवा की ब्रांडिंग, बैच नंबर और प्रिंटिंग की गुणवत्ता को ध्यान से देखें। बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी तिथि साफ-सुथरी और समान होनी चाहिए। कंपनी का लोगो, होलोग्राम और सीलिंग सही स्थिति में हो। टूटी-फूटी या छेड़छाड़ वाली पैकिंग वाली दवा बिल्कुल न लें। यदि दवा का रंग, आकार या गंध असामान्य लगे तो उसका उपयोग न करें। खरीदारी का बिल अवश्य लें और उसे सुरक्षित रखें। बहुत सस्ती या बिना बिल की दवा लेने से बचें। ऑनलाइन दवा खरीदते समय विशेष सावधानी बरतें और दवा लेते समय बैच नंबर व एक्सपायरी डेट अवश्य मिलाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध दवा या मेडिकल स्टोर की जानकारी मिलते ही तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नकली दवा कारोबार में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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