साथियों आओ संकल्प दिवस मनाएँ : तेजराम विद्रोही
6 अक्टूबर बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती पर शत-शत नमन
बाबा महेन्द्र सिंह टिकैत भारतीय किसान आंदोलन के इतिहास में एक ऐसे महान किसान नेता के रूप में याद किए जाते हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन किसानों के अधिकार, सम्मान, स्वाभिमान और आर्थिक न्याय के लिए संघर्ष करते हुए समर्पित कर दिया। किसानों के बीच वे स्नेह और सम्मान से “बाबा टिकैत” के नाम से प्रसिद्ध हुए।
चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत का जन्म 6 अक्टूबर 1935 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव में हुआ था। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े होने के कारण वे किसान की वास्तविक समस्याओं, उसकी मेहनत और उसकी आर्थिक कठिनाइयों से भली-भांति परिचित थे। कम उम्र में ही उन्हें बालियान खाप की चौधराहट की
जिम्मेदारी मिली।
भारतीय किसान यूनियन का गठन और किसान आंदोलन
किसानों को संगठित करने और उनके अधिकारों की सामूहिक आवाज बुलंद करने के उद्देश्य से भारतीय किसान यूनियन (BKU) को सिसौली से मजबूत किसान संगठन के रूप में विकसित करने में बाबा महेन्द्र सिंह टिकैत की निर्णायक भूमिका रही। उन्होंने 17 अक्टूबर 1986 को किसानों के हितों की रक्षा के लिए भारतीय किसान यूनियन का गठन किया।
बाबा टिकैत ने किसान आंदोलन को किसी राजनीतिक दल की सत्ता की राजनीति से अलग रखते हुए किसानों के आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को केंद्र में रखा। वे किसानों को जाति, क्षेत्र और राजनीतिक दलों की सीमाओं से ऊपर उठकर किसान हित में एकजुट होने का संदेश देते थे।
किसानों के लिए ऐतिहासिक संघर्ष
बाबा टिकैत ने बिजली की बढ़ी हुई दरों, गन्ने के उचित मूल्य, फसलों के लाभकारी मूल्य, किसानों की कर्ज समस्या, सिंचाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर अनेक बड़े किसान आंदोलनों का नेतृत्व किया।
1988 का मेरठ किसान आंदोलन और उसी वर्ष दिल्ली के बोट क्लब पर ऐतिहासिक किसान धरना उनके नेतृत्व की सबसे चर्चित घटनाओं में गिने जाते हैं। हजारों-लाखों किसानों की लामबंदी ने यह दिखाया कि संगठित किसान अपनी समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठा सकता है।
बाबा टिकैत की सबसे बड़ी ताकत किसानों के बीच उनका विश्वास था। उन्होंने महापंचायत को किसान समस्याओं पर सामूहिक विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक संघर्ष का प्रभावी माध्यम बनाया।
लंबे समय तक किसानों के लिए संघर्ष करने वाले बाबा महेन्द्र सिंह टिकैत का 15 मई 2011 को मुजफ्फरनगर में निधन हुआ। वे उस समय 75 वर्ष के थे। उनके निधन से किसान आंदोलन ने अपना एक महान योद्धा खो दिया, लेकिन उनके विचार और संघर्ष की विरासत आज भी किसान आंदोलनों को प्रेरणा देती है। बाबा महेन्द्र सिंह टिकैत का जीवन हमें सिखाता है कि किसान केवल देश का अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की आधारशिला है। उन्होंने किसानों को अपनी ताकत पहचानने, संगठित होने और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने का रास्ता दिखाया।
6 अक्टूबर उनकी जयंती पर उन्हें याद करना केवल एक महान किसान नेता को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि किसान एकता, किसान सम्मान और किसान स्वाभिमान के संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना भी है।
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