आदिवासी की सेवाभूमि पर कथित फर्जीवाड़े का आरोप तय, राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

आदिवासी की सेवाभूमि पर कथित फर्जीवाड़े का आरोप तय, एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा

कुर्रा के खसरा नंबर 941 को बिना सक्षम अनुमति बेचने का दावा; राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

नवापारा-राजिम। समीपस्थ ग्राम कुर्रा, विकासखंड अभनपुर में आदिवासी परिवार को आवंटित सेवाभूमि के कथित फर्जी हस्तांतरण और खरीद-बिक्री का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता गोवर्धन तारक के अनुसार ग्राम कुर्रा निवासी नोखेलाल पिता कचरू नगारची, सनत कुमार पिता कचरू, भानमती पिता होरीलाल एवं कुंजबाई पति कचरू के परिवार को सेवाभूमि के रूप में खसरा नंबर 641 रकबा 0.53 हे. वर्तमान में खसरा नंबर 941 रकबा 0.53 हे. की भूमि प्राप्त हुई थी।
कुर्रा के पूर्व सरपंच गोवेर्धन तारक ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उक्त भूमि को सक्षम अनुमति के बिना नवापारा निवासी भूमाफिया केशव सोनकर पिता कंगलू सोनकर के पक्ष में विक्रय एवं हस्तांतरित किया गया।

आदिवासी को गैर आदिवासी बता कराई रजिस्ट्री

आरोप है कि भूमि की खरीदी के दौरान राजस्व अभिलेखों में नोखेलाल नगारची को अनुसूचित जनजाति के स्थान पर गाड़ा दिखाया जो अनुसूचित जाति में दर्शाने के लिए कथित रूप से गलत प्रमाण-पत्र का सहारा लिया गया और 16 जून 2011 को खसरा नंबर 941 की भूमि का क्रय किया गया। 

बिना सक्षम अनुमति के विक्रय एवम फर्जी तरीके से हस्तांतरण

नियम कहता है कि सेवाभूमि की प्रकृति ऐसी है कि उसका सामान्य रूप से क्रय-विक्रय नहीं किया जा सकता। धारा 165 (7-ख) के प्रावधानों के अनुसार शासन द्वारा भूमि स्वामी हक़ पर प्रदत्त भूमि का विक्रय बिना कलेक्टर की अनुमति के नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद नेशनल हाईवे 130सी से लगी भूमि होने के कारण कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर लेन-देन किया गया। 

राजस्व अधिकारितों की भूमिका संदेह में

पूरे मामले में तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। शिकायत में प्रशासन से मांग की गई है कि खसरा नंबर 941 से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, जाति प्रमाण-पत्र, भूमि हस्तांतरण की अनुमति, पंजीयन दस्तावेज और नामांतरण प्रक्रिया की जांच कराई जाए।

रजिस्ट्री रद्द कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
 
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए भूमि को शासन हित में सुरक्षित कराने की मांग की गई है।

एसडीएम ने एफआईआर दर्ज  किए जाने की अनुशंसा की

अभनपुर एसडीएम ने जांच उपरांत जांच प्रतिवेदन में कई गंभीर कमिया और विसंगतिया पाई। तहसीलदार को 18 अगस्त को जारी पत्र में स्पष्ट लिखा है कि आदिवासी सेवा भूमि को फर्जी तरीके से तथ्यों को छिपाकर एवम सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना गैर आदिवासियों को विक्रय किया गया है जो कि कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है। भूमि के फर्जी हस्तांतरण एवम कूटरचना के लिए दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों/ विक्रेताओं/क्रेता के विरुद्ध छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता एवम प्रचलित विधिक प्रावधानों के तहत संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किए जाने की कार्यवाही सुनिश्चित करें और कृत कार्यवाही से इस कार्यालय को तत्काल अवगत कराएं।
आदेश जारी हुए डेढ़ माह से अधिक का समय व्यतीत हो गया परंतु तहसीलदार ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है कि तहसीलदार अपने उच्च अधिकारियों के आदेश की अवहेलना कर अपना हित साधने में जुटे हुए हैं।

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