जमीन मामला: क्रेता केशव सोनकर को हाई कोर्ट से राहत, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अभनपुर के आदेश पर लगा स्टे


अभनपुर/
ग्राम कुर्रा की एक जमीन की खरीदी-बिक्री को लेकर चल रहे विवाद में क्रेता केशव सोनकर को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। माननीय हाई कोर्ट ने मामले की शुरुआती सुनवाई के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अभनपुर के उस आदेश पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है, जिसके तहत जमीन सौदे को गलत बताते हुए एफआईआर (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई दिसंबर 2026 में तय की है।

कोर्ट में क्रेता पक्ष ने रखी अपनी दलीलें

याचिकाकर्ता केशव सोनकर के वकील ने हाई कोर्ट के सामने जमीन से जुड़े पुराने सरकारी दस्तावेज पेश किए और मुख्य रूप से ये बातें रखीं:
• पुराना राजस्व रिकॉर्ड (मिसल बंदोबस्त): क्रेता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 1929-30 के ऐतिहासिक 'मिसल बंदोबस्त' के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, जमीन बेचने वाला परिवार 'गांडा' जाति का है, जो गैर-आदिवासी श्रेणी में आता है। इसलिए इस जमीन की खरीदी में किसी आदिवासी भू-संरक्षण नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।
• नियम सम्मत खरीदी: उनका तर्क है कि यह जमीन साल 2001 में पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए और उचित कीमत चुकाकर खरीदी गई थी। इतने सालों बाद इस सौदे पर सवाल उठाना और इसे गलत ठहराना सही नहीं है।

दिसंबर तक प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक

हाई कोर्ट ने क्रेता पक्ष द्वारा प्रस्तुत मिसल बंदोबस्त के रिकॉर्ड और तकनीकी तर्कों को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अभनपुर के आदेश के अमल पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य शासन (सरकारी वकील) को इस पूरे मामले और जाति संबंधी विवाद पर अपना विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। इस स्टे के बाद अब दिसंबर 2026 में होने वाली अगली सुनवाई तक क्रेता के खिलाफ किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग्राम सभा में बवाल: उपसरपंच से मारपीट का आरोप, सरपंच पुत्र समेत 7 लोगों के खिलाफ थाने में शिकायत

डोमन की बैलगाड़ी बारात: विधायक रोहित साहू के साथ परंपरा का अनोखा उत्सव

गौरव ने बढ़ाया राजिम का गौरव, CGPSC में धमाकेदार 47वीं रैंक!